29 जनवरी 2014

गज़ल






जो दर्द तूने दबा रखा कब से सीने में।
खुदा करे कि मेरी आँख से निकल जाए॥१॥

वो हँसी जो न खिल सकी है मेरे चेहरे पे।
मेरी चाहत से तेरे लब पे वो बिखर जाए॥२॥

जिन सवालों पे ये जमाना हँसा करता है।
उन सवालों का हर जवाब तू ही बन जाए॥३॥

वो इश्क जिसको सहेजा है तूने पलकों में।
तेरी नज़रों से मेरे दिल में वो उतर जाए॥४॥

वो वफ़ा, जिसपे जमाना ये नाज़ करता है।
तुझे सँवार दे, मेरा नसीब बन जाए॥५॥

        
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6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब ... हर शेर लाजवाब है ... दिल से निकली दुआ सा ...

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 30-01-2014 को चर्चा मंच पर दिया गया है
    आभार

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  3. बहुत ख़ूबसूरत...सभी अशआर बहुत उम्दा...

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  4. यह प्रेम का समर्पण भाव ही है !

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