19 जुलाई 2012

हमारा प्रेम ईश्वरीय है...!



शायद हमारा प्रेम
ईश्वर ने अपनी कलम से लिखा है
तभी तो ये है
उसी की तरह पावन, उसी की तरह कोमल...

और भावनाएँ भी
इस तरह अश्रु के रूप में झरती हैं
मानों प्रभु खुद
अपने भक्त के लिए रो रहा हो...

दो हृदयों की सार्थकता खोकर
अहसास भी
इस तरह एकाकार हुए जाते हैं,
जिस तरह आत्मा
उस परम तत्व में विलीन होने को तत्पर रहती है...

शायद हमारा प्रेम ईश्वरीय ही है.....!!

                       x x x x

14 टिप्‍पणियां:

  1. भाव युक्त रचना ... ऐसा प्रेम सहज नहीं

    उत्तर देंहटाएं
  2. जिस दिन मन से शायद निकल जाएगा,उस दिन भी आप इसी निष्कर्ष पर पहुंचेंगी।

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक एक शब्द से जैसे ईश्वर साकार हो रहे हैं ...
    भावपूर्ण रचना !

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. ये रचना भी तो ईश्वर की ही है... उसी को समर्पित...

      हटाएं
  4. शायद हमारा प्रेम
    ईश्वर ने अपनी कलम से लिखा है
    तभी तो ये है
    उसी की तरह पावन, उसी की तरह कोमल... प्रेम ही ईश्वरीय

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर,कोमल सी रचना...

    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (21-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  7. रश्मि दी की बात से सहमट हूँ। समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://mhare-anubhav.blogspot.co.uk/

    उत्तर देंहटाएं
  8. आप सभी प्रशंसकों का दिल से धन्यवाद एवं आभार... :)

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर !

    महसूस करने की ही तो बात होती है
    ईश्वर की दी हुई हर चीज ईश्वरीय होती है !!

    उत्तर देंहटाएं
  10. शायद हमारा प्रेम ईश्वरीय ही है.....!!
    सुंदर भावाभिव्‍यक्ति !!

    उत्तर देंहटाएं